पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) इस समय अपने सबसे बड़े राजनीतिक संकट से गुजर रही है। पार्टी से निष्कासित ऋतब्रत बनर्जी ने संगठन में दो फाड़ कर दी है। बताया जा रहा है कि 80 में से 58 विधायक उनके गुट में शामिल हो चुके हैं।
सांसदों का दिल्ली में जमावड़ा
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, टीएमसी के 28 लोकसभा सांसदों में से करीब 21 सांसद दिल्ली में एक गुप्त स्थान पर डेरा डाले हुए हैं। इसी दौरान पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी और सांसद अभिषेक बनर्जी भी इंडिया गठबंधन की बैठक में हिस्सा लेने दिल्ली पहुंचे हैं।
बीजेपी में शामिल होने की अटकलें
‘संगबाद प्रतिदिन’ की रिपोर्ट के मुताबिक, टीएमसी के लगभग 21 सांसद जल्द ही भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो सकते हैं। यह घटनाक्रम सोमवार को ही संभव बताया जा रहा है। वहीं पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी भी दिल्ली रवाना हो रहे हैं।
बैठक में शामिल नेता
बैठक में काकली घोष दस्तिदार, शताब्दी रॉय, असीत माल, प्रसून बंद्योपाध्याय, अरूप चक्रवर्ती, अबू ताहेर, सुखेंदु शेखर, शर्मिला सरकार, खलीलुर रहमान और जगदीश बर्मा बसुनिया सहित कई अन्य नेता मौजूद थे।
रणनीति पर चर्चा
रिपोर्ट्स के अनुसार, सांसदों ने दिल्ली के पांच सितारा होटलों और सरकारी आवासों में छोटे-छोटे समूहों में रहकर दिनभर रणनीति पर चर्चा की। सोमवार सुबह कुछ और सांसद इस खेमे में शामिल हुए, जिसके बाद बैठक आयोजित की गई।
#WATCH | Delhi | After resigning from his post as a Rajya Sabha MP and from the primary membership of AITC, Sukhendu Sekhar Ray says on the RG Kar murder and rape incident, "Power had gone to their (TMC) heads to such an extent that they believed no one in the world could touch… https://t.co/0R7TZPpqFS pic.twitter.com/D2KT4DJlbr
— ANI (@ANI) June 8, 2026
दो विकल्पों पर विचार
सांसदों के बीच दो विकल्पों पर चर्चा चल रही है:
- लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर खुद को स्वतंत्र समूह के रूप में मान्यता दिलाना।
- सामूहिक इस्तीफा देकर पार्टी से अलग होना।
सुखेंदु शेखर रॉय का इस्तीफा
विधायकों की बगावत के बाद सांसदों के इस्तीफे का सिलसिला भी शुरू हो गया है। टीएमसी के राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और राज्यसभा दोनों से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने कहा कि जनता ने पहली बार बीजेपी के पक्ष में ऐतिहासिक जनादेश दिया है ताकि भ्रष्टाचार, महिलाओं पर अत्याचार, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे मुद्दों पर बदलाव लाया जा सके।










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